शुक्रवार 30 अक्टूबर 2026 - 04:50
ह़क के समर्थन में खामोशी समाज को फितनों के मुकाबले कमज़ोर बनाती है।हुज्जतुल इस्लाम काशानी

हौज़ा / हज़रत फ़ातिमा मासूमा सलामुल्लाह अलैहा के पवित्र हरम के खतीब हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन हामिद काशानी ने कहा कि विलायत का बचाव केवल दिल में मोहब्बत और पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि हर व्यक्ति को अपनी क्षमता और संसाधनों के अनुसार हक़ का समर्थन करना, मआरिफ़े अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम का प्रचार करना और महत्वपूर्ण अक़ीदती व सामाजिक मुद्दों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन हामिद काशानी ने हज़रत फ़ातिमा मासूमा सलामुल्लाह अलैहा के पवित्र हरम में आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की नज़र में पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि व आलेही वसल्लम के स्थान और महत्व तथा आपके निधन के बाद ह़क के इनकार के कारणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस्लाम के ऐतिहासिक घटनाक्रम से सबक हासिल करने के लिए उन बाधाओं को पहचानना आवश्यक है, जो इंसान को सत्य स्वीकार करने से रोकती हैं।

उन्होंने आगे कहा कि ईर्ष्या, द्वेष, प्रतिस्पर्धा और व्यक्तिगत हित इंसान को सत्य स्वीकार करने से रोक सकते हैं। कभी-कभी इंसान जानकारी न होने के कारण हक को नहीं पहचान पाता, लेकिन जानकारी मिलने के बाद अपनी गलती सुधार लेता है। इसके विपरीत कई बार समस्या अज्ञानता नहीं होती, बल्कि व्यक्तिगत संबंध और स्वार्थ इंसान को उस सच्चाई पर अमल करने से रोकते हैं, जिसे वह अच्छी तरह पहचान चुका होता है।

हुज्जतुल इस्लाम काशानी ने अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली अलैहिस्सलाम के साथ हज़रत जाफ़र बिन अबी तालिब, अबूज़र ग़फ़्फ़ारी, अम्मार यासिर और ज़ैद बिन सौहान जैसी महान हस्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सभी ने अपनी क्षमता और परिस्थितियों के अनुसार सत्य के समर्थन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने हज़रत अम्मार यासिर के संबंध में पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहु अलैहि व आलेही वसल्लम की एक रिवायत और उनकी शहादत का उल्लेख करते हुए हक़ और बातिल की पहचान के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि आज भी प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार सत्य का समर्थन करना चाहिए। धार्मिक और सामाजिक सभाओं में भाग लेना, अपने परिवार और मित्रों के बीच जागरूकता फैलाना तथा सांस्कृतिक और कलात्मक माध्यमों से मआरिफ़े अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम का प्रचार करना, सत्य के समर्थन के महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं।

मौलाना ने अंत में कहा कि समाज में उदासीनता और खामोशी उसे फितनों के मुकाबले कमजोर बना देती है। इसलिए राहे विलायत पर दृढ़ रहना, आपसी एकता बनाए रखना और अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम के साथ वैचारिक एवं व्यावहारिक संबंध को मजबूत करना बेहद ज़रूरी है।

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